
शिवपुरी में बागेश्वर धाम कथा का तीसरा दिन: ‘किडनैप्ड’ दादी की भावुक आरती ने जीता दिल, पंडाल में मुस्कान और आंसुओं का संगम
शिवपुरी। बागेश्वर धाम की शिवपुरी कथा के तीसरे दिन एक ऐसा पल सामने आया जिसने पंडाल को हंसी और भावुकता दोनों से भर दिया। कथा स्थल की ओर आते समय मार्ग में गुरुजी को एक बुजुर्ग माता जी मिलीं, जो ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं, लेकिन उनकी आंखों में कथा सुनने की अदम्य इच्छा साफ दिख रही थी।
गुरुजी ने स्नेहपूर्वक पूछा, “उम्मा, कहां जा रही हो?”
माता जी ने मासूमियत से जवाब दिया, “बेटा, तुम्हारी ही कथा में जा रही हूं।”
यह सुनकर गुरुजी मुस्कराए और उन्हें अपने साथ वाहन में बैठा लिया। रास्ते में माता जी ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से लगातार कथा में आ रही हैं, चलने में तकलीफ होने के कारण आयोडेक्स लगाकर ही किसी तरह पहुंच रही हैं।
यहीं पर आया दिन का सबसे मजेदार और दिल छू लेने वाला क्षण। जब माता जी ने पूछा, “मुझे कहां ले जा रहे हो?” तो गुरुजी ने हंसते हुए कहा –
“हमने तुम्हें किडनैप कर लिया है, अब सीधे कथा में ले जाएंगे और तुमसे आरती करवाकर ही छोड़ेंगे!”
यह सुनकर माता जी भावुक हो गईं और मंच पर जब आज की आरती हुई, जिसमें मीडिया प्रतिनिधि भी शामिल थे, उसी दौरान उन माता जी से भी आरती करवाई गई। कांपते हाथों और नम आंखों के साथ की गई वह आरती पूरे पंडाल में श्रद्धा और करुणा की लहर बन गई। मौजूद श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे और वातावरण “जय बालाजी” के जयघोष से गूंज उठा।

आज का दिन केवल कथा का नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और सच्ची भक्ति का उदाहरण बन गया। एक ओर लोगों के चेहरों पर मुस्कान थी, तो दूसरी ओर आंखों में आंसू – यह दृश्य शिवपुरी की इस कथा को हमेशा के लिए यादगार बना गया






