September 2, 2026
Not applied but proposal

ShivpuriTezKhabar | पैकेट वाले खाने पर जल्द दिख सकती है लाल चेतावनी, FSSAI ने ‘High Sugar, Salt और Fat’ लेबल का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में रखा

नई दिल्ली। पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थ खरीदने वाले उपभोक्ताओं को भविष्य में उत्पाद के सामने ही यह साफ दिखाई दे सकता है कि उसमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा अधिक है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक added saturated fat, added sugar और salt वाले खाद्य उत्पादों पर पैकेट के सामने लाल रंग का प्रमुख चेतावनी चिन्ह लगाया जा सकता है।

प्रस्ताव के अनुसार चेतावनी लाल रंग के hexagonal यानी षट्कोणीय आकार में दी जाएगी। उत्पाद की पोषण संरचना के आधार पर इस पर “HIGH FAT”, “HIGH SUGAR”, “HIGH SALT” या “HIGHLY SWEETENED BEVERAGE” जैसी घोषणा लिखी जा सकती है। FSSAI का कहना है कि इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को जटिल nutrition table पढ़ने के बजाय सरल, स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाली जानकारी उपलब्ध कराना है।

दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव

FSSAI ने Front-of-Pack Warning व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। पहले चरण में उन खाद्य उत्पादों को शामिल करने की योजना है जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक दो या उससे ज्यादा nutrients of concern पाए जाते हैं। कुछ निर्दिष्ट sweetened beverages को भी पहले चरण में शामिल करने का प्रस्ताव है।

दूसरे चरण में इस व्यवस्था का विस्तार उन उत्पादों तक किया जाएगा जिनमें इन nutrients में से केवल एक की मात्रा भी निर्धारित सीमा से अधिक हो। इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी देने के साथ-साथ खाद्य उद्योग को उत्पादों के reformulation और नई packaging के लिए समय देना बताया गया है।

किन उत्पादों को मिल सकती है छूट?

प्रस्ताव के अनुसार कुछ single-ingredient foods और ऐसे खाद्य पदार्थ, जो स्वाभाविक रूप से fat, sugar या salt से भरपूर होते हैं, Front-of-Pack warning requirement से बाहर रखे जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर affidavit में घी, edible oil, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पादों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि इन उत्पादों से जुड़े अन्य food safety और labelling नियम समाप्त हो जाएंगे। प्रस्ताव केवल Front-of-Pack warning की संभावित requirement से संबंधित है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आया प्रस्ताव

यह घटनाक्रम packaged foods पर स्पष्ट warning labels को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई के बाद सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने सरकार और FSSAI से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे food labelling standards के संदर्भ में गंभीर सवाल किए थे।

मामला NGO 3S And Our Health Society की याचिका से जुड़ा है, जिसमें packaged foods पर स्पष्ट Front-of-Pack warnings की मांग उठाई गई थी। FSSAI ने इसके बाद Supreme Court में compliance affidavit दाखिल करते हुए नई warning व्यवस्था का प्रस्ताव रखा।

बच्चों और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देने पर जोर

नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता किसी packaged food को खरीदने से पहले उसकी nutrition profile से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जल्दी समझ सकें। खासतौर पर बच्चों और अन्य vulnerable groups के लिए packaged और processed foods में मौजूद अधिक sugar, salt या fat की पहचान आसान बनाने पर जोर दिया गया है।

अभी लागू नहीं हुआ है नियम

यह बात स्पष्ट रूप से ध्यान रखने योग्य है कि लाल hexagonal warning labels फिलहाल पूरे देश में लागू नहीं हुए हैं। FSSAI ने इसे Supreme Court के समक्ष एक प्रस्ताव के रूप में रखा है। आगे regulatory प्रक्रिया, अंतिम नियम और implementation timeline तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन उत्पादों और कंपनियों पर यह व्यवस्था कब से लागू होगी।

इसलिए यह कहना अभी सही नहीं होगा कि चिप्स, बिस्कुट, instant noodles या cold drinks के सभी पैकेटों पर तुरंत लाल warning लगना शुरू हो गया है। फिलहाल FSSAI का प्रस्ताव भारत में packaged food labelling को अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम माना जा रहा है।

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