
शिवपुरी।
नगरपालिका शिवपुरी एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। गांधी पार्क में आयोजित मेले को लेकर उठे सवाल अब गहराते जा रहे हैं। 23 मार्च को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा अवैध विद्युत कनेक्शन के चलते मेले को निरस्त करने का नोटिस जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक मेला स्थल से टैंट और अन्य सामग्री नहीं हटाई गई है। यह स्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जानकारी के अनुसार, गांधी पार्क शहर का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जिसका ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां पूर्व में सीमित अवधि के लिए सामाजिक कार्यक्रमों की अनुमति दी जाती रही है, जिससे किसी को विशेष आपत्ति नहीं होती थी। लेकिन हाल ही में इस मैदान को पूरी तरह व्यावसायिक रूप देने की कोशिश ने विवाद को जन्म दे दिया।
बताया जा रहा है कि मेले का ठेका बिना पूर्ण लिखित प्रक्रिया के दिया गया था। जब इस मामले की जांच कलेक्टर स्तर पर हुई, तो कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद 23 मार्च को मेला निरस्त करने का आदेश जारी किया गया, लेकिन उसके पालन में ढिलाई साफ दिखाई दे रही है।
इधर, एक और मामला सामने आया है जिसमें सिद्धेश्वर मेले के लिए 7 अप्रैल तक टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसे लेकर शहर में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या यह कदम शिवपुरी के पारंपरिक और ऐतिहासिक सिद्धेश्वर मेले को प्रभावित करने की दिशा में उठाया गया है।
शहरवासियों का मानना है कि सिद्धेश्वर मेला वर्षों पुरानी आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है, और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है। वहीं, स्वदेशी मेले को बिना शुल्क दिए जाने के मामले में भी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे यह पूरा मामला और अधिक उलझता नजर आ रहा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन विवादों पर क्या रुख अपनाता है और क्या पारंपरिक मेलों की पहचान को सुरक्षित रखा जा सकेगा या नहीं।






