
ShivpuriTezKhabar | भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग A- हुई, जापानी एजेंसी JCR ने किया अपग्रेड
भारत की अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सकारात्मक खबर मिली है। जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर BBB+ से A- कर दिया है। एजेंसी ने भारत की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि, आर्थिक नीतियों की प्रभावशीलता, वित्तीय क्षेत्र की बेहतर स्थिति और सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार को इस फैसले का प्रमुख आधार बताया है।
JCR ने भारत की विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा, दोनों की दीर्घकालिक रेटिंग के लिए Stable Outlook रखा है। साथ ही भारत की Country Ceiling को भी एक पायदान बढ़ाकर A कर दिया गया है।
2007 के बाद पहली बार JCR रेटिंग में बदलाव
JCR ने भारत की BBB+ रेटिंग वर्ष 2007 से बनाए रखी थी। इस दौरान वैश्विक वित्तीय संकट, कोरोना महामारी और विभिन्न भू-राजनीतिक चुनौतियां आईं, लेकिन रेटिंग में बदलाव नहीं हुआ। अब एजेंसी ने भारत की आर्थिक स्थिति और वित्तीय मजबूती को देखते हुए इसे A- कर दिया है।
भारत की तेज आर्थिक वृद्धि बनी प्रमुख वजह
रेटिंग एजेंसी के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत निजी खपत और सार्वजनिक निवेश के सहारे लगभग 7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ती रही है।
भारत की वास्तविक GDP वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत रही। JCR का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी भारत की आर्थिक वृद्धि 6 प्रतिशत से अधिक रह सकती है।
हाल ही में जारी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखाई दी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
महंगाई के दबाव के बावजूद आर्थिक मजबूती
JCR ने कहा कि 2026 की शुरुआत से प्रतिकूल मौसम के कारण खाद्य कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा। इसके बावजूद भारत में मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य दायरे के भीतर बनी रही।
एजेंसी के अनुसार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि का मजबूत बने रहना महत्वपूर्ण है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और GST का असर
JCR ने भारत में किए गए आर्थिक सुधारों को भी रेटिंग अपग्रेड की एक महत्वपूर्ण वजह बताया है।
एजेंसी ने Digital Public Infrastructure और GST को ऐसे कदम बताया है, जिन्होंने भारत की आर्थिक बुनियाद और उत्पादकता को मजबूत करने में योगदान दिया है।
डिजिटल भुगतान और सरकारी लाभों के सीधे हस्तांतरण से वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और आर्थिक गतिविधियों की बेहतर निगरानी संभव हुई है।
बैंकिंग सेक्टर की स्थिति में बड़ा सुधार
भारत के बैंकिंग क्षेत्र में भी सुधार को JCR ने सकारात्मक माना है। मार्च 2026 के अंत तक बैंकों का Gross Non-Performing Loan Ratio घटकर 1.8 प्रतिशत रह गया।
एजेंसी के अनुसार बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी पर्याप्तता और लाभप्रदता भी मजबूत बनी हुई है। इसमें Insolvency and Bankruptcy Code, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सरकारी पूंजी सहायता और RBI की मजबूत निगरानी की भूमिका रही है।
गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र की स्थिति में भी सुधार देखा गया है।
Fiscal Deficit में कमी, Capital Expenditure जारी
भारत की रेटिंग बढ़ने के पीछे राजकोषीय सुधार भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा।
केंद्र सरकार का Fiscal Deficit वित्त वर्ष 2025-26 में GDP के 4.4 प्रतिशत तक आ गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 4.7 प्रतिशत था।
JCR ने कहा कि सरकार ने सब्सिडी सहित चालू खर्च की वृद्धि को नियंत्रित करते हुए बुनियादी ढांचे और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में पूंजीगत खर्च पर अधिक जोर दिया है। एजेंसी के अनुसार इससे सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
सरकारी कर्ज अभी भी चुनौती
हालांकि रेटिंग में सुधार हुआ है, लेकिन JCR ने कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है।
वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में केंद्र सरकार का कर्ज GDP के 56.1 प्रतिशत के बराबर था। एजेंसी को उम्मीद है कि इसमें धीरे-धीरे कमी आ सकती है।
हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त कर्ज का स्तर तथा ब्याज भुगतान का बोझ अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
JCR यह भी देखेगी कि सरकार द्वारा किया जा रहा पूंजीगत खर्च निजी निवेश को कितना बढ़ावा देता है और क्या इससे आर्थिक विकास की सरकारी खर्च पर निर्भरता कम होती है।
विदेशी मोर्चे पर भी भारत की स्थिति मजबूत
भारत का व्यापार घाटा मजबूत घरेलू मांग के कारण बना हुआ है, लेकिन सेवा क्षेत्र में अधिशेष के कारण चालू खाते का घाटा नियंत्रित स्थिति में है।
JCR के अनुसार भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और यह देश के अल्पकालिक विदेशी कर्ज से काफी अधिक है। इससे वैश्विक आर्थिक झटकों और बाहरी वित्तीय दबावों के खिलाफ भारत को मजबूती मिलती है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह अपग्रेड?
सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग किसी देश की आर्थिक और वित्तीय साख का आकलन होती है। बेहतर रेटिंग से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच देश की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।
JCR का नया फैसला भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, मजबूत होती बैंकिंग व्यवस्था, राजकोषीय सुधार, डिजिटल आर्थिक ढांचे और बाहरी वित्तीय मजबूती को सकारात्मक संकेत के रूप में देखता है।
हालांकि आने वाले समय में सरकार और राज्यों के कुल कर्ज, ब्याज भुगतान तथा निजी निवेश की गति जैसे मुद्दे भारत की आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।






